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Showing posts from August, 2020

मैं दलित हूँ आपकी गाय नहीं

  मैं दलित हूँ और आपके दमन का वो इतिहास हूँ जो आपके मानव अथवा सभ्य होने पर बार बार प्रश्न खड़ा करता है. मैं आपकी सभ्यता पर वो सवाल हूँ जिसका आपके पास कोई जबाब नहीं है. आज भी आपमें इतिहास की तरफ़ झाँकने की हिम्मत नहीं है. अगर आप उस दमन के इतिहास को सही मानते हैं तो आपसे मुझे कोई शिकायत नहीं है. तो मैं खुश हूँ, आपकी झूठी सभ्यता का ढोंग देखकर. मैं आपको उस इतिहास में ले जा रहा हूँ जहाँ आपने मुझे मानव भी नहीं समझा, मेरे अस्तित्व को भी नहीं माना. मुझे छूना भी दुस्वार समझा, आपको मेरी परछाई भी गवारा नहीं थी. आपने, अपने को देवता कहा और मैंने मान लिया, वो भी बिना किसी सवाल किये. वो मेरी निष्ठा थी और मेरी निष्ठा को आपने मेरी मुर्खता समझा. इतिहास गवाह है कि मैं उस समय भी “एकलव्य” था, मैं “कर्ण” था, मैं “शम्बूक” था, मैं उस समय भी “बरबरी” था. आप डर गए थे मुझसे और आपने मेरा अंगूठा, मेरा कवच, मेरा जीवन, सब ले लिया था और मैंने उफ़ तक नहीं किया था. मैं आपके इस समाज की वो जरूरत था जिसके बिना आप अपनी सभ्यता का झूठा ढोंग नहीं रच पाते. मैं था, इसिलए आप सभ्य थे अन्यथा आप कचड़े का ढेर होते, आप सड़ रहे होते, आप...

शिक्षक का अपमान, देश के कमजोर होने का प्रमाण है.

शिक्षक किसी भी देश की रीढ़ होते हैं . जब शिक्षक अपमान सह रहा हो तो आप समझिये की देश बुरे दौर से गुजर रहा है. मैं आपके उस विश्वविद्यालय के  शिक्षक की बात कर रहा हूँ जहाँ पर आप अपने बच्चों का दाखिला हर हालत में चाहते हैं. जिस विश्व-विद्यालय के अंतिम कट-ऑफ तक का आप इंतजार कर रहे होते हैं. जिस विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आप अपने बच्चों को दिन-रात बारहवीं की परीक्षा में बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं. आप ये जानते हैं की यह विश्विद्यालय इस देश के उन बेहतरीन विश्वविद्यालयों में शुमार हैं, जहाँ देश के हर कोने से छात्र आकर पढ़ना चाहते हैं. ये विश्वविद्यालय विश्व-पटल पर अपनी छाप छोड़ता रहा है. क्या आप ये नहीं मानेंगे की विश्वविद्यालय किसी भवन (बिल्डिंग) का नाम नहीं बल्कि वहाँ के छात्र और शिक्षक का संगम होता है. कोई भी विश्वविद्यालय, शिक्षकों की रात-दिन की मेहनत से बनता है और ये विश्वविद्यालय भी उसी कठिन मेहनत और त्याग परिणाम है. सरकारें तो भवन बनाती हैं, विश्व-विद्यालय तो शिक्षक बनाते हैं. आपके बच्चे आपसे बहुत कुछ ना बताते हों, लेकिन शिक्षक से हर वो राज बताते हैं जिसे सुनकर ये समाज...

जेएनयु तुम्हारा ‘दीया’ जलते रह्ने से ही मानवता जिंदा रहेगी

  जेएनयु मै जा रहा हूँ   तुम्हे छोड्कर नही बल्कि तुम्हे अपने साथ लेकर. तुमसे विदा लेने का समय आ गया है. ऐसा लग रहा है मानो अभी तो आये ही थे और अब जाना है. ऐसा ही है जेएनयु, आप आते तो हैं पर आप यहाँ से जा नहीं पाते, और सही भी है, क्युंकि मानवीय मूल्यो से भला कौन दूर जा पाता है. मै जब सीनीयर्स को अपने बच्चो को लेकर जेएनयु आते देखता था, तो सवाल होते थे मन मे, कि ऐसा क्या है यहाँ पर जो इतने सालो बाद भी लोग यहाँ आते हैं. मेरे कमरे भी आये थे, सत्तर के दशक के एक छात्र, अपने पूरे परिवार के साथ, अजीब सी खुशी देखी थी उनके चेहरे पर, मानो सालो बाद आप अपने आप से मिल रहे हो. जब आज जा रहा हूँ तो बस ऐसा ही कुछ ऐह्सास है. जेएनयु तुम दिल मे हो. तुम्हरा दिया हुआ “दीपक/दीया” जो कि तुम्हारे ‘लोगो’ में भी है, साथ लेकर जा रहा हूँ. उस “दीये” के प्रकाश से ही तो इस दुनिया को प्रकाशित करना है. जब आया तो बस एक शरीर मात्र था , इसमे आत्मा तो तुम्ही ने डाला है. एक छोटे से ग़ॉव का शरीर था मै, तुमने मुझे इंसान बनाया. तुमने बताया कि, मै किसी जाति, धर्म, सम्प्रदाय, लिंग या छेत्र का नही बल्कि इंसान हूँ. पहली बार ...

लाल बत्ती से आग की लौ तक: बिहार मे सामूहिक आत्मदाह की धमकी

  बिहार, जहाँ के छात्र लाल बत्ती के सपने से अपनी सुबह शुरू करते हैं,आज वो सामूहिक आत्मदाह की धमकी दे रहे हैं.छात्रों का आरोप है की,सरकार के अड़ियल रवैये से तंग आकर उन्होंने  लाल बत्ती के सपने को आग की लौ तक पहुंचा दिया है. आत्मदाह करना गलत है, मैं वय्कतिगत तौर पर इसका समर्थन नहीं करता फिर भी कारन ढूढ़ना मेरी काम है. जब कोई छात्र पुस्ताकलय छोड़, अपनी किताबें रख, सड़क पर उतरता है तो आप मान लीजिए की “आपका देश आगे नहीं बढ़ रहा है”. छात्र अपने भविष्य को सिर्फ नहीं बनाते बल्कि अपने साथ साथ, देश का भी भविष्य बनाते हैं.इसलिए तो दुनिया, छात्रों को ही देश का भविष्य मानती है. जब छात्र आंदोलित हो तो आप मानिये की देश में सरकार नैतिक मूल्यों पर खरी नहीं उतर रही है. क्यूंकि छात्रों के लिए सबसे अहम चोट छात्रों के नैतिक अवं तार्किक मूल्यों पर होता है. देश के तमाम छात्र आज कहीं न कहीं डरे हुए से लगते हैं. डरे हुए इसीलिए भी है क्यूंकि इन्ही के भविष्य के साथ इस देश का भी भविष्य जुड़ा हुआ होता है. तो क्या कोई सरकार छात्रों के हित की अनदेखी कर देश-हित की अनदेखी नहीं कर रहा होता है? बिहार प्राचीन काल...

क्यूँ टॉपर होना इतना जरूरी था रूबी के लिए?

रूबी   राय   बिहार   इंटरमीडिएट   परीक्षा   २०१६   की   टॉपर ,  फ़र्ज़ी   टॉपर   होने   के   आरोप   में   जेल   में   बंद   कर   दी   गयी .  सवाल   ये   नहीं   की   उसने   गलत   किया   की   नहीं .  वो   तो   अभी   १८   साल   की   भी   नहीं   हुई   है ,  उसे   गलत   और   सही   के   पचड़े   में   क्यूँ   फ़साना .  असल   मुद्दा   तो   टॉपर   बनने   की   ख्वाहिश   का   है .  रूबी   बिहार   में   सबसे   ज्यादा   टॉपर   देने   वाले   प्राइवेट   कॉलेज   VK  राय   कॉलेज   की   छात्र   थी .  इस   कॉलेज   ने   लगभग   हर   साल   टॉपर   ही   दिए   हैं ,  ऐसे   और   भी   कॉलेज ...