फेल बच्चे नहीं, आप हुए हैं.
बिहार इंटरमीडिएट का रिजल्ट हर साल खबर बनाता है. पिछले साल रूबी राय के टॉपर होने पर खबर और अब बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने की खबर. सरकार के शिक्षा मंत्री ने, इस रिजल्ट को ऐतिहासिक बता कर अपनी पीठ थपथपा लिया है. प्रशासन ने कदाचार पर काबू पाने का तमगा, अपने गले में लटका लिया है. ओपोजिसन पार्टी ने सारा ठीकरा सरकार पर फोड़ दिया है. अभिवावक ने भी बच्चों पर सारा दोष मढ़ दिया है. समाज ने हर साल की तरह, पास हुए बच्चों का आएएस बनना तय कर दिया है. सच है कि “सक्सेस हैज मैनी फादर बट फैलीयर इज एन ऑर्फ़न ”. फेल हुए बच्चे, अपराधिक छवि लिए घर के किसी कोने में बैठे हैं. जो बच्चे फेल होकर कुछ गलत करने का सोच रहे हों उनसे कहना है कि मैं दो ऐसे छात्रों को जानता हूँ जो इंटरमीडिएट की परीक्षा में फेल हुए थे और आज एक आएएस तो दूसरा दिल्ली विश्विद्यालय में लेक्चरर है. बहरहाल, छात्रों के ऊपर दोष मढ़ देने से बाकि सब दोषमुक्त कतई नहीं हो जायेंगे. आज सवाल छात्रों से किया जा रहा है कि वो पढ़ नहीं रहे हैं, मेहनत नहीं कर रहे हैं, अगैरह-वगैरह. तो क्या पढ़ने के लिए सिर्फ छात्र की जरुरत होती है. शायद हम भूल र...